दोना पत्तल से ग्रामीणों को रोज़गार मिलता है, यह स्वास्थ्य के लिए बेहतर है और पर्यावरण बचता है...
ग्राम-डोंगरीटोला, पंचायत-खुटा, ब्लाक-गौरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में मोहन यादव एक ग्रामीण महिला से दोने-पत्ते के बारे में बात कर रहे हैं कुछ समय पहले सरई पत्ते से बनाये जाने वाले पत्तल-दोने आज पता नहीं किस कोने में छुप गए हैं इसका मुख्य कारण है प्लास्टिक का ज्यादा उपयोग जिसके चलते आज काफी ग्रामीण लोगों के रोजगार भी चला गया है ,पर्यावरण को कोई हानि नहीं थी लोग शुद्धता के साथ भोजन करते थे लेकिन आज सीधे विपरीत हो रहा है जिसके कारण आज लोग बीमार होते हैं पर्यावरण दूषित होता जा रहा है इसलिए साथी सभी से अपील कर रहे हैं कि इस प्रथा को पुनः स्थापित किया जाए ताकि ग्रामीणों को रोजगार के रूप में एक काम मिल सके लोग शुद्धता के साथ रह सके | मोहन@8435886099

