कंजूस बनिया की कहानी...
एक कंजूस बनिया था जो गरीबों का पैसे को लूट कर अपनी तिजोरी भरता था कभी भी उसने दान पुन्य नहीं किया था जब उसकी मौत हुयी तब भी उसने कंजूसी की. मरते समय उसने एक बूढ़ी गाय को ब्राम्हण को दान में दिया और उसी समय बनिए की मृत्यु हो गयी गाय ब्राम्हण के घर पहुचते ही मर गयी यमराज के पास पहुचते ही बनिया को कहा गया कि इसने कभी भी पुन्य का काम नहीं किया इसलिए इसे नरक में डाल देना चाहिए लेकिन इसने एक गाय का दान किया था इसलिए एक दिन के लिए इसे स्वर्ग में रखा जा सकता है, इसलिए यमराज ने पूछा कि तुम सबसे पहले कहाँ जाना चाहते हो बनिए ने कहा स्वर्ग में और यमराज ने कहा कि एक दिन के लिए गाय से कुछ भी कहोगे वो करेगी बनिए ने कहा इस यमराज को मारो वो गाय को मारने दौड़ी गाय यमराज को दौडाते हुए सबसे पहले शंकर जी के पास गयी ,शंकर जी भी भागने लगे और भागते भागते ब्रम्हा जी के पास पहुचे गाय को अपने पास आते देख वो भी भागने लगे भागते-भागते विष्णु जी के पास पहुच गयी इतने में ही बनिए की शक्ति क्षीण हो गयी तब यमराज ने कहा इसे नरक में डाल दो नरक में डालते इसके पहले ही तीनो देवों ने कहा कि हमारे दर्शन करने के बाद कोई भी नरक में नहीं जा सकता है इसलिए उस कंजूस बनिए को स्वर्ग में रख दिया गया | उषा सिंह उईके@7909655194
