जीते लकड़ी मारन कबीरा ये जग वासा लकड़ी का...जीवन गीत
ग्राम-छुल्कारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक कविता सुना रहे है :
जीते लकड़ी मरन कबीरा ये जग वासा लकड़ी का-
सुनो-सुनो तू हाय रे भईया खेल बना है लकड़ी का-
जिस दिन तेरा जनम हुआ था पलंग बना था लकड़ी का-
तेरे पालने को बनवाया एक पालना लकड़ी का-
दिया मन तेरे बहलावन को एक खिलौना लकड़ी का-
गली में जब तू खेलन निकला गिल्ली-डंडा लकड़ी का-
पढने गया स्कूल में जब तू तख्ता लकड़ी का-
मास्टर ने भी दर दिखलाया लेकर डंडा लकड़ी का-
जीते लकड़ी मारन कबीरा...

