हाँसत गावत जीयत जावौ, पालव नहीं झमेला...छत्तीसगढ़ी गीत-
ब्लाक-मोहला मानपुर, जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र कोरेटी छत्तीसगढ़ी बोली में एक गीत सुना रहे है :
हाँसत गावत जीयत जावौ, पालव नहीं झमेला-
छोड़ जगत के मेला–ठेला, पंछी उड़े अकेला-
बड़े-बड़े मनखे मन आइन, पाइस कोन ठिकाना-
चार घड़ी के रिंगी चिंगी, तेखर बाद रवाना-
जइसन जेखर करम रहे वो, तइसन नाम कमाये-
पूजे जाये कोन्हों मनखे, कोन्हों गारी खाये-
कोन इहाँ का लेके आइस, लेगिस कोन खजाना-
जुच्छा आना सुक्खा जाना, का सेती इतराना-
माटी मा माटी मिलना हे, इही सत्य हे भाई-
बिधुना के आगू मनखे के, चलै नहीं चतराई-
कोट-कछेरी पाप-पुन्न के, माँगै नहीं गवाही-
बने करम के बाँध मोठरी, इही संग मा जाही...

