जंगल झन जलावा भाई, जंगल से मिलत है सहाई...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया जल, जंगल, जमीन को लेकर एक गीत सुना रहे है:-
जंगल झन जलावा भाई, जंगल से मिलत है सहाई-
जंगल के पेड़ पत्ती हवा ला बनाई, जंगल के पेड़ जड़ हमका लागत है दवाई-
जंगल झन लेते भाई, जंगल जिन रे सारे भाई-
दवा लगाई से हमरु होत है नुकसान, जड़ी बूटी सभी जली जाई, आग जिन लगावा भाई-
जंगल झन जलावा भाई, जंगल से मिलत है सहाई...
