जागो जागो रे आदिवासी, सरकार कर की छीना हमर हक़ अधिकार...गीत
कैलाश सिंह पोया, ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से एक गीत सुना रहे है:
जागो जागो रे, आदिवासी मोर-
सरकार कर की छीना हमर हक़ अधिकार-
जाग रे हमर आदिवासी भाई, सरकारी हमर हक़ अधिकार लहान छीना-
जागा, जागा रे आदिवासी भाई, अधिकार हमर लहान अपनावा-
कुर्सी पर बैठल अधिकारी, देखन भर नही आवे-
कुर्सी पर बैठल अधिकारी, देखन भर नही आवे, बाथरूम हवा महन गिर जाए-
जागो जागो रे, आदिवासी मौर, अपन अधिकार ला पहचाना...
