बिरहोर भाषा में पहाड़ को बुरु, घर को ओडा, आग को सेंगेल, कुल्हाड़ी को आके, बैल को ओरी कहते हैं...
ग्राम-खलगोरा, पंचायत-दर्रीडीह, ब्लॉक-धरमजयगढ़, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से भान साहू के साथ में केन्दाराम बिरहोर है जो उनके क्षेत्र के जंगलो में क्या-क्या होता है और इसको बिरहोर भाषा में क्या कहते है उनके बारे में बता रहे है. बिरहोर एक अति पिछडे आदिवासी समूह है जो कुछ साल पहले तक अधिकतर जंगल में रहते थे. उनकी एक ख़ास भाषा है जिसको अब बहुत थोड़े लोग ही जानते हैं. वे बता रहे हैं कि उनकी भाषा में साल पेड़ को सरजुम धारू, अतना धारू को साजा पेड़, दौरा पेड़ एसल दरू, महुआ पेंड को मनकम धारू, अचार पेड़ को तरोप दरू, सजावन पेड को सलिया दरू, धीरी मतलब पत्थर होता है बिरहोर भाषा में. केन्दाराम बिरहोर@7222968155
