अपने हक़ की लड़े लड़ाई, अपने को पहचानो...कविता
कैलाश सिह पोया एक कविता सुना रहे हैं:
अपने हक़ की लड़े लड़ाई, अपने को पहचानो-
पढना लिखना सीख गये, अब पूरी दुनिया जानो-
अपने हक़ की लड़े लड़ाई, अपने को पहचानो-
पढना लिखना सीख गये, अब पूरी दुनिया जाने
यह कैसे हो सकता है, यह मिलकर सोचे-
सुख सुविधा गाँव-गाँव तक कैसे पहुंचे...
