रेल चली भाई रेल चली सौ-सौ डिब्बे जोड़ चली...रेल पर कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया के साथ में बाबूलाल नेटी है जो एक कविता सुना रहे है:
रेल चली भाई रेल चली सौ-सौ डिब्बे जोड़ चली-
एक डिब्बे खाली थी,उसमें बैठी नियम जी-
नियम जी की काली टोपी,काले हैं कल्याण जी-
भोले है भगवान जी,सीता जी की गोद में-
कूद पड़े हनुमान जी ,लाल टमाटर खाऊंगा-
लाल-लाल हो जाऊंगा-
मामा जी बंदूक दिला दे,पाकिस्तान जाऊंगा-
पांच पकड के मरूँगा,6 पकड़ के लाऊंगा-
भारत माता के चरणों में अपना शीश झुकाउंगा...
