मै अपने बचपन की यादो को कैसे भुला सकता हूँ...गजल
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बचपन की यादों पर एक गजल सुना रहे हैं :
मै अपने बचपन की यादो को-
कैसे भुला सकता हूँ-
जिसे मैंने आँखों से देखा हूँ-
जिसे मैंने कानो से सुना हूँ-
उन यादो को मैंने दिल मे बसाया हूँ-
उन यादो को मै कैसे भुला सकता हूँ-
ये यादे मुझे सपनों मे जगाती है-
चुपचाप क्यों सोये हो-
अभी सोने का समय नही है-
उठो अब सोने का समय नही-
कुछ खास करने को है-
मंजिल तुम्हारे करीब है-
उसे जाने ना दो बेबस नही-
तो तुम करके तो दिखा दो-
तुम्हारे हाथो मै छोटी सी कलम है-
उसे तो चलने दो-
फिर तुम्हारे हाथो मे होगी सारी दुनिया-
उसे मिटने ना दो रहो-
ना रहो तुम ये उपकार तुम्हारा रहेगा...
