मैं एक दुर्गा हूं : एक बालिका की कविता
मैं एक नारी हूं, दुर्गा मेरा नाम
मेरा नाम सुनते ही दानव जाते काँप
आज के दानव वो है जो नर नारी से कराए काम
रोजी पूरा करे नहीं नहीं दे पूरा दाम
आज की नारी उठो जागो लडने हो जाओ तैयार
माँ दुर्गा के रास्ते चलकर करो दानव का संहार
एक नारी का कर्म है सुहाग बचाना धर्म
रणभूमि में प्राण बचाकर कहलावन पति सुहागन
रानी लक्ष्मी है बलिदानी उसका नाम है झांसी रानी
सामने खडी है मज़दूर किसान की नारी
जमीन बचाने होगी कुरबानी
