देशी ह नंदा गे परदेशी ह मेछराईस...छत्तीसगढ़ी व्यंग्य रचना
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ छतीसगढ़ से कन्हैयालाल पड़िहारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक व्यंग्य रचना सुना रहे हैं :
देशी ह नंदा गे परदेशी ह मेछराईस-
बाबू के दाई हर एक दिन कहिस मोला-
ए जी सुनो तो ए कैसन जमाना आईस-
चोरी चकड़ी बेईमानी हर अति होगिस-
अउ महंगाई के मार हर भरमाईस-
दरुहा गंजहा कुकुर कसर एती ओती-
एस्नेच लोगन रहबो त कईसन होही गुंजाईस-
ओखर खातिर त नरेन्द्र मोदी के मन हर भरमाईस-
जुना नोट ल बंद करके नवा नोट ल चलाईस-
अभी तक छोटन बड़न जम्मो ल परेशान हावय ओखर खातिर...
