मत रो मेरी माँ...मत रो मेरी बहना...कविता
ग्राम जजावल जिला-सूरजपुर छतीसगढ़ से सुखसागर सिंह पावले एक कविता सुना रहे है:
मत रो मेरी माँ मत रो मेरी बहना-
तेरे सूखे चेहरे को देखकर-
मुझे उजार धरती माँ कि याद आती है-
तेरे आंसू भरे नयन देखकर-
तेरी फटी साड़ी का टुकड़ा देखकर-
दुःख से रोने वाला याद आता है-
तेरा दुःख दर्द से ग्रस्त चेहरा देखकर-
तेरी हड्डी पसली से कंकाल बना तन देखकर-
दुःख कष्ट से भूखे गोंडवाना के कुपोषित बच्चो की याद आती है मुझे-
मत रो मेरी माँ मत रो मेरी माँ...
