इंसान ही इंसान का रक्त बहाता है...कविता
जिला-कानपुर उत्तरप्रदेश से के एम भाई 26/11 के शहीदों पर एक कविता सुना रहे है:
इंसान ही इंसान पे रक्त बहाता है-
पलक झपकते ही एक बुरा ख्वाब आता है-
और यू ही मन को रुला जाता है-
आसुओ का बाहों अपने आप ही निकल आता है-
जब भी वो मंजर याद आता है-
शहीदों की याद में शहीदों की में-
ये दिल यू ही गुनगुनाता है-
क्यों इंसान ही इंसान पे रक्त बहाता है...
