क्या गजब विज्ञान है कि बुतपरस्ती बढ़ गई...रचना
मालीघाट, जिला-मुज़फ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार नरेन्द्र जी की एक रचना सुना रहे है:
क्या गजब विज्ञान है की बुतपरस्ती बढ़ गई-
हम हुए आज़ाद लेकिन फाकामस्ती बढ़ गयी-
हो गया जबसे इजाफा ए खुदा तनख्वाह मे-
क्या बताये और जादा तंगदस्ती बढ़ गई-
अमन का पैगाम आया है यहाँ जिस रोज से-
मुजरिमों की इस शहर में एक बस्ती बढ़ गई-
ना खुदा हमने बनाया जो उन्हें तो ये हुआ-
हम किनारे पे खड़े थे और कश्ती बढ़ गई-
वो गिरे आकाश से तो और ऊँचे उठ गए-
देखते ही देखते कुछ और हस्ती बढ़ गई...
