ये धमक मुसर धुमाढाडे...एक गाँव की कहानी...गीतों में
ग्राम पंचायत-धुमाढाड, ब्लाक प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी अपने गाँव की कहानी बता रहे हैं | वे कहते हैं उनके पूर्वज लोग जब वहाँ पर बसने के लिए आये तो चारों ओर ढाड यानी पेड़ थे और लकड़िया काट-काट और जलाकर उन्होंने खेत बनाया और खुद कूट कूट कर भोजन बनाते थे जिसमे बहुत स्वाद था । वे अपने गाँव के बारे में एक गीत सुना रहे हैं
ये धमक मुसर धुमाढाडे-
कहे मना कूटे जुना धान हो-
ये धमक मुसर धुमाढाडे-
दसवना कूटे बीसवाना छाठे-
ये धमक मुसर धुमाढाडे...
