क्यों शांत है सृष्टि? बाल यौन शोषण पर एक कविता
क्यों नहीं हवा का तेज झोंका आता, हैवान को अपने साथ उड़ा ले जाता
क्यों नहीं भूकंप का एक तेज झटका आता और हैवान को मेरे शरीर से दूर ले जाता
क्यों नहीं जानवरों का एक झुण्ड आता और हैवान को अपने पैरों तले कुचल देता
क्यों नहीं नदियों में तेज आती बाढ और हैवान को अपने साथ बहा ले जाती
क्यों नहीं किसी बड़े पेड़ की डाल टूटकर हैवान के ऊपर गिर जाती
क्यों नहीं कोई दैवीय चमत्कार होता और हैवान का सर कलम हो जाता
क्यों नहीं मेरा शरीर पत्थर बन जाता और हैवानियत का खेल धरा रह जाता
क्यों नहीं धरती मान का ह्रदय फट जाता और मेरा शरीर उसमें समा जाता
क्यों सृष्टि हमें ऐसा रूप देती है जिसकी सुरक्षा हमारे हाथों में नहीं
क्यों सृष्टि ऐसे हैवान की रचना करती है जिसकी हैवानियत की कोइ सीमा नहीं
कृष्ण मुरारी यादव
