मुस्कराता रहे जीवन, मुस्कराता रहे जीवन...कविता
जिला-कानपुर (उ.प्र.) से के एम भाई एक कविता सुना रहे हैं :
मुस्कराता रहे जीवन !!
तितली बनकर यूँ ही – उड़ता रहे जीवन-
फूलों सा यूँ ही-
महकता रहे जीवन-
हर एक मोड़ पर यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
पंक्षियों सा यूँ ही-
चहकता रहे जीवन-
तिनका तिनका बटोरकर यूँ ही-
दाना चुगता रहे जीवन-
हर घड़ी यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
हर आंगन पर यूँ ही-
सजता संवरता रहे जीवन-
डाल डाल पर यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहे जीवन-
हर घड़ी, हर पल यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
दीप बनकर यूँ ही-
प्रेम के बीज बांटता रहे जीवन-
दिन रात यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
मुस्कराता रहे जीवन...
