घुमड़-घुमड़ कर आसमान में देखो मंडराया बादल...झूमर कविता
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से अमन कुमार एक झूमर कविता सुना रहे हैं:
घुमड़-घुमड़ कर आसमान में देखो मंडराया बादल-
आया बादल, आया बादल देखो-देखो बालू काला-
हाथी मोटा दांतों वाला कितने रूप बनाया बादल-
आया बादल, आया बादल...
