मुनि का अहम् और छिपकली की कुर्बानी की कहानी...
महाभारत के युद्ध के पश्चात युधिष्ठिर द्वारा यज्ञ किया जा रहा था | इस यज्ञ में आमंत्रण के लिए जब सेवक दुर्वासा मुनि के पास पहुँचे तो मुनि ने आमंत्रित लोगो के बारे में जानना चाहा तो सेवक ने बताया तैतीस करोड़ देवी देवता को पूछा गया है | इस पर मुनि ने निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया | यज्ञ के पश्चात भोज का आयोजन था | मुनि द्वारा माया रचा गया | जिसमें चील के द्वारा एक मरे हुए सांप को भोजन वाले बरतन में गिरा दिया |यह सब छिपकली देख रही थी | उसने सोचा कि अब क्या किया जाए ? थोड़ी ही देर में यज्ञ समाप्ति के बाद खीर परोसा जाएगा | छिपकली ने उसी समय खीर में छलांग लगा दी और गर्म खीर मे तड़प-तड़प कर अपनी जान दे दी | आसपास के लोगो ने छिपकली को काफी भला बुरा कहा | बरतन से जब खीर फेका जा रहा था तो उसमें मरा हुआ सांप देखकर सब लोगो को समझ आ गया कि भोज में आये लोगो के जान बचाने के लिए छिपकली ने अपनी कुर्बानी दे दी |सुनील कुमार@9308571702
