माथे की बिंदी हैं हिंदी: हिंदी दिवस के अवसर पर रचना...
उषा किरण विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर एक रचना सुना रही है:
हिंदी ह्रदय की धड़कन हैं, काया है हिन्दुस्तान का-
माथ के बिंदी हैं हिंदी, भाषाओं के श्रृंगार का-
कण-कण में माधुर्य है अविरल हिंदी के रसधार का-
मीठी किलकारी हैं हिंदी, हिमालय के प्राण का...
