शिक्षक दिवस बार-बार मनाएंगे...शिक्षक दिवस पर कविता
जिला-कानपुर (उ.प्र.) से के एम भाई शिक्षक दिवस के अवसर पर एक कविता सुना रहे हैं:
शिक्षा के गीत गुनगुनायेंगे-
आज़ाद पंक्षी बन झूमे और गायेंगे-
लहरों से मिल बहते जायेंगे-
खुला आसमां और खुली हवा-
न रंज होगा न कोई शिकवा-
हर आंगन में फूल खिलेगा-
जब साकार होगा हर एक सपना-
न हिन्दू न मुस्लिम-
न सिख न इसाई-
कुछ ऐसा होगा कारवां-
न राम न रहीम-
न संत न कबीर-
राजा होगा अपना फ़कीर-
एक ही आवाज और-
एक ही पहचान-
सारा जग होगा एक समान-
जब होगा अपना शिक्षक महान – मिलकर सब-
झूमेंगे, नाचेंगे,गायेंगे-
शिक्षक दिवस बार बार मनाएंगे-
शिक्षक दिवस बार बार मनाएंगे ...
