एक साथ सब मिलकर बोलो-भारत जोड़ो, भारत जोड़ो...कविता
वीरेन्द्र गन्धर्व राजनांदगांव छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं:
गोरो ने किया प्रस्थान-
चल सफल अभियान हुआ-
भारत छोड़ो-
अब सुनो श्रीमान-
कहो अब भारत जोड़ो-
आपस में क्यों अनबन है-
हम एक दूजे के दुश्मन है-
नशे से दूषित हुआ समाज-
माँ बहनो की लूटती लाज-
बच्चे क्यों नहीं सुरक्षित आज-
खतरे में हैं दलितो की जान-
सब का बनेगा हिन्दूस्तान-
भेद भाव के जंज़ीरो को सब मिल के तोड़ो-
एक साथ सब मिलकर बोलो-
भारत जोड़ो, भारत जोड़ो...
