पर फूलो को चुभते हुए किसी ने नही देखा है...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी कविता सुना रहे है:
काँटों को चुभते हुए, सबने देखा है-
पर फूलो को चुभते हुए किसी ने नही देखा है-
पर फूलो को चुभते हुए, मैंने करीब से देखा है-
जन्म दाता को आज तक किसी ने नही देखा है-
पर पालनहार को सभी ने देखा है-
पर मैने जन्म दाता को, बहुत करीब से देखा है-
जिसके मुक्कदर में रहेगा, वही तो देखेगा-
बकवास नही करता हु मै-
क्यूंकि इस जहा से मोहब्बत हो गया है-
तुम मोहब्बत करो ना करो मुझे फर्क नही होने वाला-
यह जिन्दगी मैंने, समर्पण कर दिया है-
ये जहाँ के लिए, ये जहाँ ने मुझसे मोहब्बत किया है-
उस जहाँ के लिए में, कुर्बान हूँ , तुम मानो या ना मानो-
तुमसे कोई खता नही ये मेरी कुर्बानी, तुम्हे याद दिलाता ही रहेगा-
मेरा जहाँ से उठ जाने के बाद, कैसा होगा ये जहाँ-
इसीलिए सोचता रहता हु, बर्बादी की खन्जर मैंने देख लिया हूँ-
अपने पैरो तले जमीं, को खिसकते देख लिया हूँ – ये बर्बादी कि मन्जर देखो, कब तक यू ही चलता रहेगा-
जब तक लोगो में प्रेम नही, तब तक यह मजारा होता रहेगा...
