बाल-बाल को संवारिये बाल नहीं तो बेहाल...स्वरचित रचना
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी स्वरचित एक रचना सुना रहे हैं :
बाल-बाल को संवारिये बाल नहीं तो बेहाल-
बाल को ऐसा संवारिये जैसी बुड्डी बाल-
बाल हो तो तन की शोभा, बाल हो तो घर की आभा-
बाल को ऐसा बांधिये कहीं बिखर न जाए-
बाल को ऐसा ताडिये कंचन जैसा निकल जाए
बाल हो तो समाज की शान, बाल हो तो देश की आन-
बाल को दो ऐसा ज्ञान जो देश हो जाए महान...
