तो रो रो रो पानी गिरे, सावन में करेला फूटे...लरिया बोली में लोकगीत
राजेन्द्र गुप्ता तमनार रायगढ़ छत्तीसगढ़ से लरिया बोली में एक प्राचीन लोकगीत गा रहे हैं | वे बता रहे हैं कि यह क्षेत्र पहले ओडिया राजाओं के अधीन था और यहाँ की भाषा ओडिया और छत्तीसगढ़ी का मिश्रण है | इस बोली में राजा और प्रजा के बीच तकरार को इस इस लोकगीत में बताया गया है:
तो रो रो रो पानी गिरे-
सावन में करेला फूटे-
चल चल बेटी गंगा जाबो-
गंगा ले गोदावरी-
पाका पाका आमा खाबो-
आमा के डाढी टूट गे-
गोदाम राजा जूझ गे...
